TMA CLASS 10TH

NIOS Hindi TMA Class 10th Session 2024-25

हिंदी (201) शिक्षक अंकित मूल्यांकन – पत्र   प्रश्न 1. (क) “रॉबर्ट नर्सिंग होम में” पाठ का मूल संदेश क्या है? अपने शब्दों में लिखें। उत्तर- कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ द्वारा लिखी गई कहानी “रॉबर्ट नर्सिंग होम में” एक सशक्त संदेश देती है। यह कहानी हमें मानवीय सेवा, करुणा और समर्पण का महत्व सिखाती है। नर्सिंग होम में मदर टेरेसा और क्रिस हैल्ड जैसे लोगों का उदाहरण देकर लेखक यह बताता है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है। कहानी हमें यह भी सिखाती है कि समाज के कमजोर वर्गों के प्रति हमारी जिम्मेदारी क्या है और हमें उनके दुखों को कम करने के लिए क्या करना चाहिए। Watch Full TMA:https://youtu.be/PHOp0ddhTJo Contact For TMA PDF: 84487 31058 (WhatsApp) Hindi PDF Link: https://shorturl.at/HlFrO प्रश्न 2. (क) ‘इसे जगाओ’ कविता में ‘सपनों में खोए रहने’ तथा ‘सपने देखने’ में अंतर किया गया है। आप अपने भविष्य को सँवारने के लिए जो सपने देखते हैं, उन्हें पूरा करने के लिए क्या रूपरेखा बनाएँगे? उत्तर- “इसे जगाओ” कविता में सपनों को देखना और सपनों में खो जाना दो अलग अवस्थाएं हैं। सपने देखना एक लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है, जबकि सपनों में खो जाना एक निष्क्रिय अवस्था है। अपने सपनो को पूरा करने के लिए मैं एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करूंगा, छोटे-छोटे लक्ष्य बनाऊंगा, कड़ी मेहनत करूंगा, और अपने सपनों को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा। प्रश्न 3. (ख) ‘अपना पराया‘ पाठ में त्वचा को शरीर रूपी दुर्ग की बाहरी दीवार कहा गया है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? दो बिंदुओं की सहायता से स्पष्ट करें। उत्तर- हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ। सबसे बाहरी परत: त्वचा शरीर की सबसे बाहरी परत है जो शरीर के अंदरूनी अंगों को बाहरी दुनिया से अलग करती है। सुरक्षा कवच: यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है जो हानिकारक बैक्टीरिया, विषाणु और अन्य बाहरी तत्वों से हमें बचाती है।इसलिए, त्वचा को शरीर रूपी दुर्ग की बाहरी दीवार कहना बिल्कुल सही है।  प्रश्न 4. (ख)- गिल्लू’ पाठ के आधार पर स्पष्ट करें कि मानव और पशु-पक्षी एवं प्रकृति के बीच एक सौहार्दपूर्ण संबंध बनाने में आपका क्या कर्तव्य है? ऐसे दो सुझाव प्रस्तुत करें जिससे मानव और प्रकृति के बीच सम्बंध सौहार्दपूर्ण बनाने में सहायता मिल सकती है। उत्तर – “गिल्लू” पाठ हमें सिखाता है कि प्रकृति और पशु-पक्षी हमारे मित्र हैं। हमें उनके साथ प्रेम और करुणा से पेश आना चाहिए। हमारा कर्तव्यः सहानुभूति दिखाना: हमें पशु-पक्षियों की भावनाओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए और उनकी देखभाल करनी चाहिए। प्रकृति का संरक्षण: हमें पेड़-पौधेलगाने चाहिए, पानी बचाना चाहिए और प्रदूषण कम करना चाहिए जीवों को नुकसान न पहुँचाना: हमें जानवरों को परेशान नहीं करना चाहिए और उन्हें मारना तो बिल्कुल भी नहीं चाहिए। सुझावः जंगलों का संरक्षण: हमें जंगलों को काटने से रोकना चाहिए और वन्यजीव अभयारण्यों को बढ़ावा देना चाहिए। पर्यावरण शिक्षा: स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए ताकि बच्चे बचपन से ही प्रकृति के प्रति जागरूक हो सकें। इस तरह हम सभी मिलकर प्रकृति और पशु-पक्षियों के साथ एक सौहार्दपूर्ण संबंध बना सकते हैं। प्रश्न 5. (क) ‘भारत की ये बहादुर बेटियाँ’ महिलाओं की अभूतपूर्व उपलब्धियों को व्यक्त करता हुआ फीचर है। पाठ में शामिल किन्हीं दो महिलाओं की उपलब्धियों की विवेचना कीजिए। उत्तर – भारत की बहादुर बेटियाँ: दो प्रेरणादायी कहानियाँ “भारत की ये बहादुर बेटियाँ” फीचर उन भारतीय महिलाओं की कहानियों को जीवंत करता है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इनमें से दो महिलाओं की कहानियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। भीकाजी कामा और सरोजिनी नायडू: सर्वप्रथम, हमें उन महिलाओं का जिक्र करना होगा जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। भीकाजी कामा और सरोजिनी नायडू जैसी महिलाओं ने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उन्होंने विदेशों में भारत की । की आवाज बुलंद की और देश के भीतर स्वतंत्रता संग्राम को गति दी। आसिमा चटर्जी: आसिमा चटर्जी जिन्होंने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आसिमा चटर्जी भारत की पहली महिला वैज्ञानिक थीं जिन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के लिए रास्ता प्रशस्त किया। ये सभी महिलाएं हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने साबित किया है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों के बराबर सफल हो सकती हैं। प्रश्न 6. (ख) हिंदी के दो समाचारपत्रों के किन्हीं पाँच समाचारों का चयन कीजिए। अंगों के अनुसार शीर्षक देते हुए इन समाचारों को वर्गीकृत करें और उन पर संक्षिप्त टिप्पणी भी प्रस्तुत करें। उत्तर – समाचारों का चयन और उनका विश्लेषण समाज में हो रही गतिविधियों का सूक्ष्म अध्ययन करने का अवसर प्रदान करता है। इस परियोजना में, मैंने हिंदी के दो प्रमुख समाचार पत्रों – “दैनिक भास्कर” और “अमर उजाला” से पाँच प्रमुख समाचारों का चयन किया है। इन समाचारों को उनके विषय के अनुसार वर्गीकृत करते हुए उनके ऊपर संक्षिप्त टिप्पणी प्रस्तुत की गई है। दैनिक भास्कर: राजनीतिक समाचार समाचार: भारत में आगामी चुनावों की तैयारियाँ जोरों पर संक्षिप्त विवरण: देशभर में आगामी लोकसभा चुनावों के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों की तैयारियाँ जोरों पर हैं। सभी प्रमुख दल अपने उम्मीदवारों का चयन कर रहे हैं और मतदाताओं को रिझाने के लिए रणनीतियाँ तैयार कर रहे हैं। टिप्पणी: यह समाचार दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में चुनाव एक महत्त्वपूर्ण घटना है, जिसके लिए दलों द्वारा व्यापक स्तर पर रणनीतिक तैयारी की जाती है। जनता के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए उम्मीदवारों का चयन चुनाव में जीत सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम होता है। अमर उजाला: आर्थिक समाचार समाचार: भारतीय रुपये में गिरावट, डॉलर के मुकाबले 83 के स्तर पर पहुँचा संक्षिप्त विवरण: हाल ही में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 83 के स्तर पर पहुँच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार की अनिश्चितता और भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार की धीमी गति इसके प्रमुख कारण हैं। टिप्पणी: यह समाचार भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय मुद्रा की स्थिति पर प्रकाश डालता है। रुपये की गिरावट से आयात महंगा हो सकता है और महँगाई दर बढ़ने की संभावना है, जो आर्थिक असंतुलन पैदा कर सकता है। दैनिक भास्कर: सामाजिक समाचार समाचार: नई

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Painting 225 TMA Hindi Medium Class 10th 2024-25

चित्रकला (Painting) (225) Class 10th Tutor Marked Assignment(2024-25)   प्रश्न 1.  (a) फर्श की सजावट से संबंधित दो लोकप्रिय लोक कला रूपों की तुलना करते हुए दो विशेषताएं लिखिए। उत्तर- फर्श की सजावट से संबंधित दो लोकप्रिय लोक कला रूपों में “रंगोली ” और “मांडना” शामिल हैं। डिजाइन: रंगोली में जीवंत रंगों और जटिल पैटन का उपयोग होता है, जबकि मांडना में साधारण रेखाएं और आकृतियां होती हैं। उद्देश्य: रंगोली का उद्देश्य घर को सजाना और सौभाग्य लाना है, जबकि मांडना मुख्यतः धार्मिक अवसरों पर किया जाता है।   प्रश्न 2. (b) किसी भी “प्रभाववादी शैली” के कलाकार की पेंटिंग का वर्गीकरण इसकी दो विशेषताएं देते हुए करें। उत्तर- प्रभाववादी शैली के कलाकार क्लॉड मोनेट की पेंटिंग “वाटर लिलीज़” का वर्गीकरण किया जा सकता है। प्रकाश और रंग: मोनेट की पेंटिंग में प्राकृतिक प्रकाश के विभिन्न परिवर्तनों को दर्शाया गया है, जिससे दृश्य में जीवंतता आती है। छोटे ब्रश स्ट्रोक: उन्होंने छोटी, अलग-अलग ब्रश स्ट्रोक्स का उपयोग किया है, जिससे रंगों का मिश्रण और गहराई का एहसास होता है। Watch Full TMA: https://youtu.be/-nTrImUUDww Contact For TMA PDF:  84487 31058 (WhatsApp) Painting PDF Link: https://imojo.in/1a0K9nO   प्रश्न 3 (a) “फुलकारी” शब्द की व्याख्या कीजिए तथा कला के रूप में प्रयुक्त एक रूपांकन का वर्णन कीजिए । उत्तर–  फुलकारी पंजाब की एक पारंपरिक सुई का काम है। ‘फुल’ का अर्थ फूल होता है और ‘कारी’ का अर्थ कारीगरी होता है। इस कला में कपड़े पर रंगीन धागों से फूलों और अन्य सुंदर डिजाइन बनाए जाते हैं। फुलकारी को आमतौर पर महिलाओं के कपड़ों, जैसे दुपट्टे, ओढ़नी और चादरों पर किया जाता है। एक रूपांकन का वर्णन: फुलकारी में अक्सर पंजाबी संस्कृति और प्रकृति से जुड़े रूपांकन देखने को मिलते हैं। उदाहरण के लिए, एक आम रूपांकन में मोर को बारीक डिजाइन से दर्शाया जाता है जो खुशी और सौंदर्य का प्रतीक है।   प्रश्न 4 (b) कला के तत्वों और डिजाइन के सिद्धांतों के आधार पर “कांथा सिलाई डिजाइन और रूपांकनों” का वर्णन करें। उत्तर–  कांथा सिलाई डिजाइन और रूपांकन: कांथा सिलाई डिजाइन और रूपांकन: कला और डिजाइन का संगम कांथा सिलाई, भारतीय हस्तशिल्प का एक अद्भुत नमूना है, जिसमें कला के तत्व और डिजाइन के सिद्धांत खूबसूरती से समाहित होते हैं। रेखाएं: कांथा में रेखाएं विभिन्न आकारों और मोटाई की होती हैं। ये रेखाएं न केवल डिजाइन को परिभाषित करती हैं बल्कि भावनाओं और कहानियों को भी व्यक्त करती हैं। सीधी रेखाएं स्थिरता का बोध कराती हैं, जबकि वक्र रेखाएं गति और लय को दर्शाती हैं। आकृतियां: कांथा में विभिन्न आकृतियां जैसे फूल, पत्ते, पशु-पक्षी आदि का प्रयोग होता है। ये आकृतियां प्रकृति से प्रेरित होती हैं और डिजाइन को जीवंत बनाती हैं। रंग: कांथा में रंगों का प्रयोग संयमित ढंग से किया जाता है। पारंपरिक रूप से प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है, जो डिजाइन को एक शांत और शांतिपूर्ण रूप देते हैं। ताल: कांथा में विभिन्न आकृतियों और रेखाओं को एक खास ताल में व्यवस्थित किया जाता है, जो डिजाइन को एक सामंजस्यपूर्ण रूप देता है। पोतः कांथा में विभिन्न प्रकार के कपड़ों का उपयोग किया जाता है, जिससे डिजाइन में पोत की विविधता देखने को मिलती है। अंतरालः कांथा में सफेद स्थान का उपयोग भी कलात्मक रूप से किया जाता है। यह सफेद स्थान डिजाइन को और अधिक जीवंत बनाता है। कांथा सिलाई में डिजाइन के सिद्धांत जैसे संतुलन, एकता, विपरीतता आदि का भी पालन किया जाता है। ये सिद्धांत डिजाइन को सौंदर्यपूर्ण और आकर्षक बनाते हैं। इस प्रकार, कांथा सिलाई कला और डिजाइन का एक अद्भुत संगम है, जिसमें भारतीय संस्कृति और परंपराओं का भी झलक मिलता है।   प्रश्न 5 (a) बिष्णुपुर के टेराकोटा तथा हमारे दैनिक जीवन में उपयोग में आने वाली टेराकोटा वस्तुओं के बीच महत्वपूर्ण अंतर के आधार पर एक विश्लेषणात्मक टिप्पणी लिखिए। उत्तर–  बिष्णुपुर के टेराकोटा और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले टेराकोटा में अंतर बिष्णुपुर के टेराकोटा और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले टेराकोटा दोनों ही मिट्टी से बने होते हैं, लेकिन इन दोनों के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। बिष्णुपुर के टेराकोटा: कलात्मक मूल्य: बिष्णुपुर के टेराकोटा को कला के रूप में देखा जाता है। इनमें जटिल नक्काशी, मूर्तियाँ और भित्तिचित्र होते हैं जो धार्मिक और पौराणिक विषयों को दर्शाते हैं। ऐतिहासिक महत्व: ये टेराकोटा मंदिरों और अन्य इमारतों को सजाने के लिए उपयोग किए जाते थे और वे भारतीय कला और वास्तुकला के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अद्वितीय शैली: बिष्णुपुर के टेराकोटा की अपनी एक विशिष्ट शैली है जो अन्य क्षेत्रों के टेराकोटा से अलग है। कार्यः इनका मुख्य कार्य सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा हुआ था।  दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले टेराकोटाः उपयोगिता: ये टेराकोटा मुख्य रूप से रोजमर्रा के उपयोग के लिए बनाए जाते हैं, जैसे कि बर्तन, खिलौने, और सजावटी वस्तुएं। सरल डिजाइन: इनका डिजाइन आमतौर पर सरल होता है और इनमें जटिल नक्काशी 33 कम होती है। अंतर का कारणः यह अंतर दोनों के निर्माण के उद्देश्य और उस समय की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों के कारण हो सकता है। निष्कर्ष बिष्णुपुर के टेराकोटा और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले टेराकोटा दोनों ही मिट्टी की कला के उदाहरण हैं, लेकिन इनके निर्माण का उद्देश्य, डिजाइन और कलात्मक मूल्य अलग- अलग हैं। बिष्णुपुर के टेराकोटा को कला के रूप में देखा जाता है जबकि दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले टेराकोटा अधिक व्यावहारिक होते हैं।   Q.6 (b) विभिन्न लोक कला रूपों पर आधारित तस्वीरों को इकट्ठा करें और A3 आकार के कागज पर एक कोलाज बनाएं। फिर, “कला के तत्वों (रेखा, रंग, रूप, बनावट और स्थान आदि) का उपयोग कैसे किया गया है? इस पर एक वर्णनात्मक टिप्पणी लिखें। उत्तर–  एक कोलाज बनाया गया  है- टिप्पणी: 1.लोक कला का एक दृश्य अन्वेषण: क्रिया में कला के तत्व लोक कला, एक समुदाय की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिबिंब है, जो अक्सर सरल लेकिन शक्तिशाली कलात्मक तकनीकों का उपयोग करती है। परंपरा और आवश्यकता में निहित ये तकनीकें कहानियों, भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान को व्यक्त करने के लिए कला के तत्वों का रचनात्मक रूप से उपयोग करती हैं। आइए तस्वीरों को हमारे दृश्य मार्गदर्शक के रूप में उपयोग करते हुए देखें कि विभिन्न लोक कला रूपों में इन तत्वों का उपयोग

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